Sunday, March 8, 2009

नेताओ को परखने की कसौटी

मैंने Lee Iacocca (ली आईकोक्का) की लिखित पुस्तक "वेयर हव आल द लीडर्स ग़ौन?" (Where have all the Leaders Gone?) अभी हाल में ही पढ़ी। यह ली आईकोक्का ही वह महाशय हैं जिन्होंने डूबने की कगार पर बैठी क्र्य्स्लेर (Chrysler) कंपनी को सन् १९८० में न केवल उबारा था बल्कि उसको नियमित घाटे वाली स्थिति से निकाल कर एक लाभ अर्जित करने वाली संस्था में परिवर्तित कर दिया था। वाहन निर्माण में वैसे भी वो फोर्ड (Ford) की भी कई सफल कारों के भी जन्मदाता रहें हैं जिसमे फोर्ड मुस्टेंग, फिएस्टा , मरकरी कूगर इत्यादी प्रमुख हैं। ली ने ही मिनी-वैन का खाका तैयार किया था ।
अपनी इस पुस्तक में (जोकि २००७ में प्रकाशित हुई थी) ली ने अमेरिका में उस समय होने वाले चुनाव हेतु राजनैतिक माहौल और नेतृत्व की समीक्षा की थी। पूरी पुस्तक में उठाये गए प्रश्न, दिशाहीन नेतृत्व, जन मानस का असमंजस्य और वोट देने या ने देने की दुविधा जितनी अमेरिकी परिवेश में सटीक थे वे उतने ही अपने भारतीय परिवेश में भी। उसी समीक्षा में उन्होंने नेताओ को परखने की कसौटी के तौर पर एक मापदंड दिया हैं जिसे उन्होंने ९-सी (9-C) का नाम दिया हैं। यह ९-सी हैं-

  1. करिओसिटी (जिज्ञासा): सभी नेताओ को अपने अहम् से इतर सभी पहलुओ को जानने और समझने की चाहत होनी चाहिए। किसी नवइन विचार और संभावना को तलाशने की जिज्ञासा ।
  2. Creativity (सृजनात्मकता): वह नेता मिली हुई जानकारी और संसाधनों को प्रयोग कैसे कर पायेगा। क्या वह लंबे समय से चली आ रही परिपाटी से अलग कुछ करने की हिम्मत रखता हैं। क्या वो अपने विचारो को एक सिमित दायरों से बाहर लाकर कुछ कर गुजरने की संभवाना रखता हैं।
  3. Communication (वार्तालाप): किसी भी सफल नेता की लिए यह ज़रूरी हैं की वो जन-मानस से कितनी सहजता से बात करता हैं। केवल उनसे नहीं जो चाटुकारिता में रत हो बल्कि उनसे भी को प्रखर विरोधी हो... सच को व्यक्त करने से नहीं चुके ...
  4. Character (चरित्र): वैसे तो भारतीय परिवेश में यह एक दुर्लभ (संभवतः विलुप्त भी) गुण हैं। फिर भी यह जानना अत्यन्त आवश्यक की शक्ति भोग के साथ भी वो अपने चरित्र को सम्हाल पायेगा या फिट भ्रष्ट हो जाएगा (तबादले, पार्टी फंड चंदा, जन्मदिन के उपहारों आदि का अमेरिका में प्रचलन नहीं हैं वरना ली इन सबको तो इस मापदंड के दायेरे से बाहर कर देते)
  5. Courage (पौरुष): किसी भी विषम स्थिति से निपटने के लिए कितनी दृढ़-शक्ति हैं...हर चुनौती को समझने और ललकारने की कितनी हिम्मत हैं...क्या केवल कागजी-शाब्दिक शेर हैं या शिकारी भी हैं।
  6. Conviction (विचारधारा): हमारे नेताओ की किन मूल्यों और सिद्धांतो में आस्था रखते हैं। उनकी विचारधारा राष्ट्र-हित को सर्वोपरि रखती हैं या नहीं...
  7. Charisma (आकर्षण): लोगो के हुजूम में वो अलग नज़र आता हैं या नहीं...लोग उसके व्यक्तिव से रीझते हैं या नहीं॥एक सफल नेता की लोगो का विश्वास प्राप्त करने और एक भीड़ खीचने की शक्ति लोकतंत्र में ब्रम्हास्त्र से कम नहीं हैं ।
  8. Competence (सक्षमता/योग्यता): लोकतंत्र में नेतृत्व किसी तलवार कि धार पर चलने से कम नहीं हैं। नेताओ को अपने को परिणाम-उन्मुख सिद्ध करना ही पड़ेगा। एक राष्ट्र जहाँ वैचारिक साम्यता असंभव हो में जबतक नेता अपनी कुशलता, योग्यता और सक्षमता से किसी भी परियोजना/कार्यक्रम में परिणाम देकर स्वं को सिद्ध न करे तब तक उसका नेतृत्व संशय के दायरे से बाहर नहीं होता।
  9. Common Sense(सामान्य ज्ञान): सबसे साधारण गुण जोकि आसाधारण परिणाम देता हैं और अक्सर चरित्र कि तरह ही दुर्लभ होता हैं।

हमको भी इसी तरह कुछ मापदंड बनाकर अपने नेताओ को चुनना चाहिए। लोकसभा के चुनावों की घोषणा हो चुकी हैं इसलिए ऐसे मापदंड बहुत ज़रूरी हो जाते हैं। आपको क्या लगता हैं क्या यह ९ मापदंड भारतीय परिवेश में भी उपयुक्त बैठेगे कि नहीं? या इनमे कुछ फेर-बदल होनी चाहिए।

3 comments:

Pankaj said...

यह एक ऊम्दा किताब है | चार साल पहले, क्रयसलर से नाता जोड़ा तो ली-आइकोकका की यह किताब पड़ोस के पुस्तकालय से ले कर पड़ी थी | मेरा विचार मे नेतागिरी की सारे मापदंड हर देश मे नहीं लागू हो सकते ... एनहे विकसित देशों मे ही इस्तेमाल किया जा सकता है|

Sudhir (सुधीर) said...

पंकज मैं मानता हूँ कि विकसित देशो में ऐसे मापदंड बनाना आसन हैं..फ़िर भी नेताओ इस इस दिग्भ्रमित, दिशाहीन भीड़ में एक सार्थक नेता चुनने के लिए कुछ तो मापदंड होने ही चाहिय चाहे वे अंधों में काना राजा का चयन ही क्यों न हो....

Dr. Munish Raizada said...

सुधीर जी:
आपके विचार उम्दा लगे. आपके ब्लॉग पर आपका ईमेल न मिल पाने के कारण यह सन्देश भेज रहा हूं. मैं Springfield IL में हूँ. कृपया देखिये:www.mifindia.org
मेरी ईमेल पर अपना ईमेल भेजिए ताकि आप से संपर्क कर सकूं.

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