Monday, February 9, 2009

विप्र स्नानं पखे पखे


अभी कुछ देर पहले दैनिक जागरण पढ़ रहा था कि एक समाचार पढ़ते हुए ठिठक गया। समाचार ही कुछ अटपटा था - "नाराज बेटे ने किया मां के खिलाफ केस"। शीर्षक पढ़कर लगा कि अपने किसी देहात का किस्सा हैं। "जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरियसी" में आस्था रखने वाले मन सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि अपने राष्ट्र में ऐसा भी कोई कर सकता हैं...अतः समाचार पढ़ना शुरू किया। पढ़कर चैन कि साँस ली कि घटना पोलैंड कि हैं। हुआ ये कि एक २२ वर्षीय व्यक्ति ने आपनी माँ पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगा कर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई; कारण माँ ने उसे स्नान करने के लिए कहा था। उसने साथ में, उससे घरखर्च में हाथ बताने के लिए अनुरोध किया था। वास्तव में ही गलती माँ की हैं - इस कलयुग में बच्चों से घरखर्च कि उम्मीद और साथ में नहाने के लिए अनुरोध। वो पीढियां तो कबकी आर्यावत के बाहर विलुप्त हो गयी हैं। (शायद जम्बू द्वीप फिर भी इक्का-दुक्का प्राणी मिल भी जाए किंतु उसके पार तो मिलना मुश्किल ही हैं ।) हमारे बाबूजी होते (या माँ भी) तो पहले दो चपत रसीद करते फिर देते एक घंटा हमारी निष्कर्मण्यता प्रवचन तदुपरांत कहते नहाने के लिए। एक बार ही ऐसा अनुभव होने पर आप ख़ुद ही उसकी पुनरावृति होने नहीं देते।

वैसे तो स्नान से भागने वालों की कमी नहीं हैं - कहा भी हैं "रोज़ स्नानं देह ख्यानम, विप्र स्नानं पखे पखे"। इतनी महंगाई के ज़माने में रोज साबुन पानी का खर्च उठा पाना सम्भव ही कहाँ? रही सही कसर विलायती सर्दी पूरी कर देती हैं...ग्लोबल वार्मिंग के इस युग में भी सर्दी पीछा नहीं छोड़ती। अतः नहाने धोने की उलझन कौन पाले। हमारे गाँव के पंडित जी तो साल में तीन बार ही नहाते हैं "फगुआ, खिचडी और भातुआन, करुआ पंडित के तीन स्नान।" हमारे एक चाचा (जोकि बड़े भाई की तरह अधिक हैं) तो स्नानगार में मग्गा-मग्गा पानी गिराकर और फिर सर भीगा कर चले आते थे। हमारे दादाजी को उनके पावों की जाँच करनी पड़ती थी यह जानने के लिए कि वे नहायें हैं या नहीं। कभी-कभी तौलिया भी देखा जाता था कि कितना भीगा हैं। एक बार चाचाजी ने बचने के लिए तौलिया कुछ ज्यादा ही भीगा दिया था - बिचारे तब भी पकड़े गए थे। अब जब आर्यावर्त के प्राणियों का स्नान से परहेज हैं तो फिर अन्यत्र का क्या कहना?

1 comment:

ज्ञानदत्त । GD Pandey said...

वह ब्राह्मण ही कैसा जो नियम कानून अपनी सुविधानुसार मोड़/गढ़ न सके!
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कृपया फॉण्ट बढ़ा दें और वर्ड वैरी फिकेशन की वैतरणी निकाल दें!

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